सत्य सेवा चैरिटेबल टीम (SSCT) की नियमावली
मुख्य उद्देश्य समाज का कल्याण और जरूरतमंदों की मदद करना है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन, सामाजिक कुरीतियों का निवारण, सांस्कृतिक और नैतिक उत्थान, और कमजोर वर्गों (जैसे अनाथ, वृद्ध, बेघर) के लिए सहायता प्रदान करना शामिल है, ताकि जन-सेवा हो सके और समाज को लाभ मिले। मुख्य उद्देश्य: शिक्षा और प्रशिक्षण: स्कूल, कॉलेज, प्रशिक्षण केंद्र खोलना और छात्रों को छात्रवृत्ति, ऋण आदि देना। स्वास्थ्य सेवा: चिकित्सालय, औषधालय चलाना, निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित करना, गंभीर बीमारियों के इलाज में मदद करना और स्वास्थ्य जागरूकता फैलाना। गरीबी उन्मूलन: गरीबों और बेसहारा लोगों को भोजन, वस्त्र और आवास जैसी बुनियादी ज़रूरतें पूरी करने में मदद करना। सामाजिक उत्थान: सामाजिक कुरीतियों (जैसे दहेज प्रथा, नशाखोरी) को दूर करना, नारी उत्थान और परिवार नियोजन को बढ़ावा देना। सांस्कृतिक और नैतिक विकास: सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा देना, साहित्य का प्रकाशन करना और समाज में नैतिक मूल्यों का प्रचार करना। सामुदायिक विकास: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विकास कार्यक्रम चलाना, जिससे समुदाय आत्मनिर्भर बन सके। पशु कल्याण: जानवरों की देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित करना। शिक्षा: गरीब बच्चों को शिक्षा प्रदान करना, जिसमें छात्रवृत्ति, स्कूल की आपूर्ति, और शिक्षण सहायता शामिल है। स्वास्थ्य: गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त या कम लागत वाली स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना, जिसमें दवाएं, चिकित्सा शिविर, और जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं। आजीविका: गरीबों को रोजगार के अवसर प्रदान करना, जिसमें कौशल प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, और उद्यमिता विकास शामिल है। पर्यावरण: पर्यावरण की रक्षा करना और प्रदूषण को कम करना, जिसमें वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, और जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं। संस्था मे कौन कौन सदस्य बन सकता है। शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, सिंचाई विभाग, जल निगम, राजस्व विभाग, ग्राम्य विकास एव पुष्टाहार विभाग, पीडब्लूडी विभाग, बैंक कर्मचारी, पुलिस, होमगार्ड, कलेक्ट्रेट विमाग सभी विभाग के संविदा कर्मचारी, आउट सोर्सिंग कर्मचारी वित विहीन विद्यालय/ कालेज, मदरसा के शिक्षक, प्राइवेट सेक्टर मे कार्य करने वाले कर्मचारी अधिकारी, मीडिया कर्मी इंजीनियर, किसान, मजदूर, व्यापारी, गृहिणी, छात्र छात्राए, विधायक, एमपी, डाक्टर, जिला पंचायत सदस्य, पार्षद, ग्राम प्रधान, ग्राम सदस्य तथा समस्त इच्छत नागरिक संस्थ द्वारा निर्धारित शुल्क संस्था मे जमाकर सदस्य बन सकता है, एवं 18 वर्ष से 60 वर्ष सीमा तक अपनी सदस्यता जारी रख सकता है।
1 समस्त ' वर्गों में शिक्षा का प्रसार-प्रचार करना तथा समस्त वर्गों के वच्चों' की नैतिक सामाजिक, शारीरिक, बौद्धिक, " सांसकृतिक, धर्मिक, चारित्रिक एवं कलात्मक उन्नति का समुचित विकास करना ।
2. समस्त वर्गों में शिक्षा के उत्तरोत्तर विकास हेतु प्राइमरी से लेकर हाईस्कूल इण्टरमीडिएट एवं डिग्री कालेज की स्थापना, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा ' बोर्ड, सीबीएसई एवं आईसीएसई, यूजीसी शिक्षा पद्धति से करना एव इनका सचालन करना।
3. क्रियाशील सदस्य के आकस्मिक निधन पर प्रत्येक सदस्य द्वारा दिवंगत ' परिवार के सदस्य /नामिनी को आर्थिक सहयोग ।
4. क्रियाशील सदस्य के बेटी विवाह मे आर्थिक सहयोग को संस्था व सदस्यो द्वारा आपसी सहयोग से "बेटी विवाह उपहार"
5. अति प्राचीन व प्राचीन स्थानो, देवालय आदि स्थानो के पुर्ननिर्माण, जीणोद्धार करवाना व सुरक्षित करना ।
6. समस्त वर्गों के लिए आधुनिक शिक्षा, कम्प्यूटर शिक्षा, रोजगार परक शिक्षा संस्थानों, तकनीकी इंजीनियरिंग, औद्योगिक एव प्राविधिक शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, व्यवसायिक शिक्षा, कृषि एवं प्रबन्धक शिक्षा संस्थानों की स्थापना कर उन्हें स्वावलम्बी एवं आत्मनिर्भर बनाना।
7. समस्त वर्गों / अल्पसंख्यक बच्चों की सुविधा हेतु छात्रावास, " क्रीडा केन्द्र, व्यायामशाला, पुस्तकालय, वाचनालय और ऑडिटोरियम एवं स्टेडियम आदि की स्थापना करना।
8. अल्पसंख्यक निर्धन बालक / बालिकाओं को केन्द्रीय एवं राज्य सरकार के सम्बन्धित विभागो व संस्थानों ' के सहयोग से सुलभ प्रशिक्षण जैसे सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, हस्तशिल्प कला, वास्तुकला, दस्तकारी, दरी कालीन, ड्राइंग पेन्टिंग प्रशिक्षण तथा टंकण एवं कम्प्यूटर (हार्डवेयर, साफ्टवेयर. इन्फार्मेशन टैक्नोलॉजी). खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्म निर्मर बनाना।
9. समस्त वर्गों के उत्थान एवं कल्याण हेतु चिकित्सालय, आश्रय स्थल, वृद्धाश्रम, विकलांग आश्रम, नारी उत्थान संस्थानों, अनाथालय, विवाह स्थल की स्थापना एवं संचालन करना ।
10. निर्धन एवं निराश्रित बालक बालिकाओं को शिक्षित करने हेतु आवासीय विद्यालय की स्थापना करना ।
11. ट्रस्ट के नाम से अथवा अन्य नामों से शिक्षण संस्थानों अथवा धर्मार्थ संस्थानों की स्थापना व उनका विधिवत प्रबन्धन एवं संचालन करना ।
12. वन्य प्रणियों की सेवा करना व जीव जन्तुओं के कल्याण के लिये कार्य करना व उनके प्रति मानवीय संवेदनाएं व्यक्त करना तथा जीव जन्तु कल्याण बोर्ड से सम्पर्क स्थापित करना तथा संरक्षण करना । प्रकृति / पर्यावरण का सरंक्षण करना, नदियों, तालाबों आदि जल स्रोतों के उत्थान के लिए कार्य करना।
13. अपनी आय बढाने के लिए अन्य ' प्रकार की रचनात्मक गतिविधियों को ' संचालित करना।
14. कृषि को बढ़ावा देने के लिए कृषकों को खाद, बीज, कीटनाशक एवं अन्य कृषि उपकरण उपलब्ध कराना। कृषि उपजो/ खाद्यान्न का क्रय विक्रय करना एवं खाद्य प्रसंस्करण का कार्य करना।
15. समस्त वर्गों के धर्म, साहित्य, संस्कृति, भाषा आदि का अनुरक्षण विकास एवं प्रचार प्रसार करना।
कन्यादान योजना की नियमावली
1. 1 जनवरी 2026 से "कन्यादान योजना" का शुभारंभ किया जा रहा है। पंजीकृत सदस्यों का पंजीकरण एक वर्ष के लिए मान्य है। हर वर्ष सदस्यता का नवीनीकरण करना अनिवार्य है अन्यथा सदस्यता स्वतः समाप्त मानी जाएगी।
2. SSCT द्वारा जारी योजनाओं में सदस्य को 95% सहयोग करना अनिवार्य होगा। यदि सदस्य द्वारा कन्यादान योजना में 95% अवसरों पर सहयोग नहीं किया गया है तो आवेदन हेतु पात्र नहीं होगे।
3. कन्यादान योजना में पात्रता के लिए दिवंगत सदस्य के परिवार को सहयोग करना अनिवार्य है। SSCT के पात्र सदस्य ही कन्यादान योजना के लिए पात्र होगे। जिन सदस्यो द्वारा नियमानुसार दिवंगत सदस्य के मनोनीत को सहयोग नहीं किया है वे सदस्य कन्यादान योजना के लिए पात्र नहीं होगे।
4. कन्यादान योजना में लाभार्थी सदस्य द्वारा लाभ के बाद न्यूनतम 5 वर्ष तक कन्यादान योजना के 95% अवसरों पर आर्थिक सहयोग करना अनिवार्य है। यदि अवसरों पर सहयोग नहीं किया तो असामयिक निधन और गंभीर बीमारी इलाज के आर्थिक मदद हेतु सदस्य स्वतः अपात्र हो जाएगा। उसके साथ ही उक्त लाभार्थी SSCT के समस्त आर्थिक लाभ योजना में स्वतः अपात्र हो जाएगा।
5. सदस्यो को अधिकतम कन्यादान योजना के तहत दो बार ही लाभ प्रदान किया जाएगा। सदस्य स्वयं के विवाह पर कन्यादान योजना के पात्र नहीं होंगे।
6. एक परिवार के दंपति दोनों ही SSCT के सदस्य हैं तो योजना का लाभ मात्र एक को ही प्राप्त होगा।
7. कन्यादान योजना में आवेदन हेतु सदस्य के जिस बेटी की विवाह होना है उसकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक हो।
8. SSCT कन्यादान योजना के तहत लाभ कन्या के पिता के खाते में होगा। अतः सहयोग पर किसी भी प्रकार की न्यायिक या कानूनी चुनौती देने का अधिकार किसी व्यक्ति या सदस्य के पास नहीं होगा। कन्यादान योजना के तहत सहयोग प्राप्त करना एक नैतिक अधिकार है।
9. "कन्यादान योजना " में विवाह तिथि से एक माह पूर्व आवेदन करना अनिवार्य होगा। जिससे सदस्य का स्थलीय सत्यापन किया जा सके और आर्थिक सहयोग कराने के लिए कम से कम 20 दिन का समय हो जिससे योजना का लाभ पूरी तरीके से दिया जा सके।
10. कन्यादान योजना के तहत जिस कन्या के माता-पिता दोनों जीवित नहीं हैं। उसका भाई SSCT का सदस्य है ऐसी स्थिति में भाई द्वारा सभी प्रकार के सहयोग में 95 % सहयोग अनिवार्य होगा। ऐसे सदस्यों को एक बार बहन के लिए व एक बार पुत्री के लिए ही पात्र माना जाएगा। क्योंकि कन्यादान योजना के तहत एक सदस्य को दो बार ही इसका लाभ दिया जाएगा। साथ ही विवाह में सहयोग हेतु आवेदन के समय भाई-बहन होने का प्रमाण एवं माता-पिता दोनों के मृत्यु का प्रमाण देना होगा।
असामयिक निधन सहयोग योजना
असामयिक निधन योजना के तहत SSCT चैरिटेबल ट्रस्ट भारतवर्ष के समस्त नागरिकों को लाभान्वित करने के लिए योजना का गठन किया गया है। इस योजना के लाभ को प्राप्त करने के लिए SSCT का सदस्य होना अनिवार्य है। योजना के पात्र एसएससीटी के नियम व शर्त के अनुसार ही मान्य होगे। SSCT की सदस्यता हेतु भारतवर्ष का स्थाई निवासी होना अनिवार्य है। सदस्यता प्राप्त करने की उम्र सीमा 18 वर्ष से लेकर 60 वर्ष तक रहेगी। 60 वर्ष आयु पूर्ण होते ही सदस्य की सदस्यता स्वतः ही समाप्त मानी जाएगी। समस्त नियमों और शर्तों के अनुसार सदस्यता शुल्क 100 रुपए सत्य सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट को दान देना और उसमें पंजीकरण करना अनिवार्य रहेगा।
1. सदस्यों को हर वर्ष ट्रस्ट को 100 रुपए वार्षिक दान करना होगा। यदि सदस्य हर वर्ष सदस्यता का नवीनीकरण नहीं करते हैं तो योजनाओं के लाभ से उन्हें वंचित रखा जाएगा।
2. योजनाओं के समस्त लाभ के लिए ट्रस्ट के आधिकारिक ग्रुप व सूचनाओं के माध्यम से जुड़कर सदैव सूचनाओं आदान प्रदान करते रहें। सूचनाओं के अभाव में यदि आप किसी भी लाभ से वंचित रह जाते हैं। तो उसके उत्तरदाई सदस्य स्वयं होंगे।
3. SSCT के सदस्य की असामयिक दुखद निधन होने पर शेष अन्य सदस्यो द्वारा संस्थापक व ट्रस्ट के आधिकारिक व नामित व्यक्ति द्वारा नियमानुसार सूचना पर न्यूनतम धनराशि सीधे दिवंगत सदस्य के नामित बैंक खाते में सहयोग करेंगे और सहयोग भेज कर SSCT के वेबसाइट satyasevatrust.in पर उनकी सूचनाओं को पूर्ण रूप से पंजीकृत करेगे। सहयोग के बाद पंजीकरण न करने पर उनका सहयोग अपूर्ण माना जाएगा।
4. SSCT की सदस्यता एक वर्ष पूर्ण होने के उपरांत व 95% सभी योजनाओं में सहयोग करने के बाद ही उन्हें असामयिक योजना का पात्र माना जाएगा।
5. SSCT के संस्थापक व ट्रस्ट के जुड़े आधिकारिक व्यक्ति परीक्षण करने व निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होंगे। नामित व सदस्य किसी भी प्रकार का सहयोग प्राप्त करने के लिए कानूनी दावा करने का कोई अधिकार नही होगा।
6. किसी भी सदस्य द्वारा आत्महत्या की स्थिति में असामयिक निधन की योजना में लाभ के लिए मान्य नहीं होंगे। यदि सदस्य द्वारा बनाए गए नॉमिनी ने खुद ही सदस्य की हत्या में संलिप्त पाया जाता है। तो वह इस योजना के लाभ से स्वतः ही अपात्र होगा।